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5 Best Moral stories in Hindi for class 8 ~ Hindi stories for class 8

5 Best Moral stories in Hindi for class 8 ~ Hindi stories for class 8

I have written 5 best moral stories in hindi for class 8. These are so many powerful hindi moral stories for class 8 students. So you will read these short hindi stories for class 8.

Moral stories in hindi for class 8

आज हम Hindi stories class 8 students के लिए लाये है। मुझे उम्मीद है आपको यह stories पसंद आएगी।


अहंकारी शेरनी (hindi stories for class 8)


Story 1 (hindi stories for class 8)

एक जंगल था। जिसमें एक शेर और शेरनी रहती थी। वह जंगल का राजा और शेरनी उस जंगल की रानी थी।  दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। उन दोनों के दो बच्चे भी थे। परंतु दोनों का स्वभाव भिन्न था।

शेर एकदम विनम्र था। जंगल में हरकोई शेर का बहुत सम्मान करता था। अगर जंगल में कोई भी लड़ाई हो जाए तो शेर उनका समाधान निकालता।

दूसरी तरफ शेरनी ऐसी नहीं थी। उसको अपनी ताकत बहुत अभिमान था। वह उस जंगल में हर किसी को अपने से छोटा मानती थी।

 वह अपने बच्चों को भी जंगल के किसी प्राणी या जानवर के साथ खेलने नहीं देती थी।

वह जंगल में जाती तो किसी से सीधी बात नहीं करती थी बल्की मुंह दूसरी तरफ करके उसे नीचा बता कर निकल जाती थी।

 जब उनके बच्चे किसी जानवर के साथ खेलते तो अपने बच्चों को डांटती और कहती की, “बच्चों मैंने मना किया है ना कि जंगल में किसी जानवर के साथ मत खेलो, उनकी तुम्हारे साथ खेलने की औकात नहीं है। यह तुम्हारे स्तर के नहीं है।”

यह सुनकर बच्चे और वह जानवर दुःखी हो जाते।

Moral stories in Hindi for class 9

एक दिन की बात है मां और बच्चे दोनों खाना खा रहे थे। तब अचानक पीछे से एक जहरीला सांप बच्चों को मारने के इरादे से आया और धीरे-धीरे बच्चों की तरफ बढ़ने लगा।

Moral stories in hindi for class 8

मां को इस बारे में कुछ भी पता नहीं चला। पर गिद्धने उसे देख लिया। उसने उस सांप को मार डाला। उसने बच्चों की इस तरह जान बचाई।

पर शेरनी उसको शुक्रिया करने के बदले अपने बच्चों को लेकर वहां से चली गई। इस बात से गिद्ध को बहुत बुरा लगा।

एक बार मां और बच्चे नदी किनारे खेल रहे थे। शेरनी को नींद आ गई और वह सो गई। बच्चे मां को बिना बताए अकेले ही वहां से चले गए।

जब शेरनी की नींद खुली तब उसने देखा तो बच्चे वहां नहीं थे। वह बहुत डर गई और घबरा गई क्योंकि शेर भी किसी जंगल के काम से बाहर गया था। वह जंगल में अपने बच्चों को ढूंढने लगी।

 उसने बंदर को देखा और पूछा कि “तुमने मेरे बच्चों को देखा?”

 बंदर यह सोच में पड गया की शेरनी मुझसे बात कर रही है।

 उसने कहा कि, “रानी जी आप मुझसे बात कर रही है क्योंकि मैं जब भी आपसे प्रणाम करता था तब आप अपना मुंह दूसरी ओर कर चली जाती थी। इसीलिए मैं यह बात पूछ रहा हूं।”

यह सुनकर शेरनी को बहुत बुरा लगा। अपने व्यवहार पर उसे काफी शर्मिंदगी महसूस हुई। वह वहां से चली गई।

वहां रास्ते पर एक हाथी मिला। उसने हाथी से अपने बच्चों के बारे में पूछा।

 हाथी ने कहा कि, “में तो एक पागल हाथी हूं ना! आप तो मुझे हमेशा यही कहती थी। तो मुझे कैसे पता?”

 शेरनी यह सुनकर कुछ भी बोले बिना वहां से चली गई।

 ऐसा कर सब शेरनी को कुछ ना कुछ बोलने लगे जो शेरनी इन्हे हमेशा अहंकार में आकर कहती थी।

यहां तक कि एक चूहेने भी मदद करने से मना कर दिया।

उसने कहा कि, “ मैं तो एक नासमझ और बहुत छोटा जीव हूँ ना! तुम मुझे यह ही कहती थी। तो मुझे कैसे मालूम?

 यह सब देख कर शेरनी को अपनी भूल समझ में आई और उसने अपने अहंकार के लिए सब से माफी मांगी। और फिर वह रोने लगी।

 सब जानवर ने उन्हें माफ किया और उनके बच्चों को ढूंढने लगे।

हाथी ने उनके बच्चे को एक पहाड़ पर खेलते हुए ढूंढ लिया। शेरनी बच्चों को देखकर बहुत खुश हुई और वह सब के साथ अच्छे से जंगल पर रहने लगी।

नैतिक सीख:

हमें कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। हमें हमेशा सब के साथ अच्छे से रहना चाहिए। हमें नहीं पता की जिस का हम अहंकार में आकर अपमान करते है कल उसकी की इस कहानी तरह जरूर पड़ जाये।

Moral of this hindi short story: 

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 We should never be arrogant. We should always be good behavior with everyone. We don’t know that we insullt someone in ego, we may need him in the future.


रेत और पत्थर (Hindi moral stories for class 8)


Story 2 (hindi moral stories for class 8)

एक गांव था। जिसका नाम रामपुर था। उस गांव में दो दोस्त रहते थे। जिसमें एक दोस्त का नाम मिलन और दूसरे दोस्त का नाम ऋषभ था।

 उन दोनों दोस्त के आगे पीछे कोई नहीं था। वह दोनों दोस्त अकेले थे। वो दोनों एक ही घर में रहते थे। वह दोनों कुछ ना कुछ काम करके पैसा लाकर अपना गुजारा करते थे।

तब वह एक दिन उन्होंने सोचा कि हम काम तो कर ही रहे हैं। पर अब हमें यह देश और दुनिया कैसी है। यह देखनी चाहिए।

 इसीलिए वह दोनों के पास जितना पैसा था। वह लेकर उन्होंने दुनिया घूमने का निर्णय लिया।

ऋषभ ने कहा कि, “हम पैसे भी घूमते-घूमते उस जगह से कमा लेंगे। जिसे पैसे की कमी की कोई भी बात नहीं होगी। उसे हम बहुत ही अच्छे से घूम सकेंगे और इस तरह दुनिया भी घूम लेंगे।”

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 वह एक दिन घूमते-घूमते रण में पहुंचे। उनमे से ऋषभ पानी की बोटल  से पानी पीने लगा।

मिलन पानी की बोटल  में से ऋषभ को पीने से रोकने लगा।

उसने ऋषभ को कहा कि, “सावधानी से पानी पीना और बहुत ज्यादा पानी मत पीना।”

 यह सुनने के बावजूद भी ऋषभ ने पानी की बोटल  को खाली कर दिया।

 यह देखकर मिलन को बहुत गुस्सा आया। उसने गुस्से में आकर ऋषभ को चांटा लगा दिया।

 उसने कहा कि, “हम यहां रण में है। हमें यहाँ पानी की कभी भी जरूरत पड़ सकती है। तुम्हें पता नहीं है कि पानी यहाँ रण में मिलना कितना मुश्किल होगा। इसीलिए तो मैं तुम्हें मना कर रहा था।”

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तब मिलन ने रेत में लिखा की, “मुझे मिलन ने चांटा लगाया।”

ऐसा लिखने के बाद दोनों दोस्त आगे बढ़ने लगे। वहां उन्होंने दूर एक पानी का तालाब देखा। दोनों यह देख कर बहुत खुश हो गए।

 उन्होंने पहले अपनी बोटल  भरी। बोटल भरने के बाद दोनों तालाब में नहाने लगे।

 वही ऋषभ तालाब में अचानक से डूबने लगा।

तब मिलन ने उसकी जान बचाई। उसकी जान बचाने के लिए ऋषभ ने मिलन को धन्यवाद दिया। मिलन ने भी उसको चांटा लगाने के लिए ऋषभ से माफ़ी मांगी।

वह दोनों फिर से अच्छे से बात करने लगे। उन्होंने एक पेड़ के नीचे कुछ समय आराम करने का सोचा।

 वहा कुछ समय आराम करने के बाद जब मिलन ने जाने को कहा तब ऋषभ ने वहा एक पत्थर पर लिखा कि “मिलन ने मेरी जान बचाई।”

 यह देख मिलन ने आश्चर्य से पूछा कि यह तुम क्या कर रहे हो?

पहले तुमने रेत पे लिखा और फिर पत्थर पे लिखा।

 उसने कहा कि जब तुमने मुझे चांटा मारा। वह याद रखने जैसी कोई चीज नहीं थी। क्योकि दोस्तों के बीच ऐसा चलता है। इसलिए मैंने उसे रेत पर लिखा जिसे वह पवन आने पर मिट जाये।

 तुमने मेरी जान बचाई। यह हमेशा याद रखने की चीज है। इसीलिए मैंने इसे पत्थर पर लिख दिया है कि, “तुमने मेरी जान बचाई।” जिसे कोई भी मिटा ना सके।

नैतिक सीख:

 एक सच्चा मित्र हमेशा अपने मित्र के साथ बिताई हुई अच्छी चीजों को याद रखता है बजाय बुरी चीजों के।

Moral of this hindi short story: 

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A true friend always remembers the good things spent with his friend rather than the bad things.


चालाक दूधवाला 


Story 3

एक नगर था जिसका नाम था कृष्ण नगर। उसमें एक दूधवाला रहता था। उसकी सारी पीढ़ी दूध बेचने का काम करती थी और वह भी दूध बेचता था।

उसके पास बहुत सारी भैसे थी। वह उस गांव का सबसे बड़ा दूध वाला था। वह काफी धनवान भी था। और साथ ही वह बहुत बुद्धिमान भी था।

वह हरदिन बहुत सारा दूध लोगों को बेचता था। ना सिर्फ लोगों को बेचता था। बल्कि वह उस गांव के राजा को भी अपनी भैसों का दूध बेचता था।

 जब उसके पिता का अवसान हुआ तब उसके पास सिर्फ पांच भैसे थी। पर अब उसके पास उसकी मेहनत और बुद्धिमानी के कारण 50 भैसे है।

 वह हरसाल एक या दो भैसे रामलाल नाम के एक व्यापारी से खरीदता था। इस साल भी वह रामलाल के पास गया।

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 दूधवाले ने रामलाल की भैसो में से एक अच्छी सी भैंस को पसंद किया। उसने उसका मूल्य दिया और भैंस को लेकर चला गया।

 बीच में एक जंगल का रास्ता था। वह उस जंगल में अपनी भैस को लेकर जा रहा था।

तब वहां अचानक से एक आदमी आया। जिसके हाथ में एक बहुत बड़ा सा डंडा था। उसने उसे डंडे को दिखाकर धमकी दी कि, “मुझे तुम्हारी भैंस देकर चले जाओ।”

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दूधवाले ने कहा कि, “मैंने इसे धन देकर खरीदा है मैं तुम्हें यह बेस भैंस क्यों दूं?”

तब उस दूधवाले को मारने की धमकी दी। दूधवाला यह देखकर कुछ उपाय सोचने लगा। उसे एक युक्ति सूजी।

 उससे कहा कि, “क्यों नही? मैं आपको यह भैंस दे सकता हूं।”

बहुत ही अच्छे से उसने उसे अपनी भैंस दे दी।

यह देखकर वह आदमी खुश हो गया।

दूधवाले ने उस आदमी से कहा कि, “मैं तो भैंस लेने गया था। अगर मैं गांव में खाली हाथ जाऊंगा तो मेरी बहुत बदनामी होगी। इसीलिए मुझे उसके बदले कुछ दे सकते हो?।”

 उस आदमी ने कहा कि, “मैं तुम्हें क्या दे सकता हूँ?”

तब दूधवाले ने कहा कि, “तुम मुझे तुम्हारा यह डंडा दे दो।

तब वह आदमी ने सोचा कि, “भैस तो मेरे पास आ गई है अब इस डंडे का क्या लाभ? ऐसा सोचकर उसने डंडा दे दिया।”

दूधवाले ने डंडा लेते ही उसे धमकी दी कि, “उसकी भैंस वापस कर दे वरना उसे डंडे से मार देगा।”

 उसने उसकी भैस वापस दे दी। भैस वापस देने के बाद उसने उसका डंडा वापस मांगा।

तब दूधवाले ने कहा कि,  “मैं तुम्हें बेवकूफ दिखता हूँ। यहाँ जिसके पास डंडा है उसी की भैंस होती है।” ऐसा सुनकर वह आदमी भाग गया।”

नैतिक शीख: 

इस कहानी से दो सीख मिलती है।

1. हमें हमेशा कोई भी ऐसी समस्या में शांति और बुद्धिमानी से काम करना चाहिए।

2. हमें कोई चीज के वजह से अगर कोई चीज मिली हो तो उसका महत्व उस मिलने वाली चीज के मुकाबले ज्यादा हो जाता है ये बात को ध्यान में रखना चाहिए।

Moral of this hindi short story: 

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There are two lessons learned from this story.

1. We should always work peacefully and wisely in any such problem.

2. If we have received something due to something, then its importance is more than that which is found, this thing should be kept in mind.


3 वादे (Hindi stories for class 8)


Story 4

एक गांव था। जिसमें एक वैध रहता था। जो बहुत अच्छा इंसान था। वह गांव में हर किसी को मदद करता था। गांव में हर कोई भी उनका सम्मान करता था।

एक दिन की बात है। रात का समय था। बहुत ही बारिश हो रही थी। तब वैध के घर के दरवाजे पर एक इंसान आया।

उन्होंने वैध  को बुलाया। वैध ने दरवाजा खोला तो देखा कि एक इंसान बहुत भीगी हालत में दरवाजे के बाहर खड़ा था। उसकी तबीयत ठीक नहीं लग रही थीं। वह इंसान इतनी बारिश में ठंड के मारे काप रहा था।

उसने इतनी बारिश में एक दिन उनके घर में रहने देने की प्रार्थना की। वैध ने उस इंसान को अपने घर में रुकने  दिया। वैधने उनको रहने दिया और कुछ दवाइयां दी।

जब वह सुबह उठा तो उसकी तबीयत ठीक हो गई थी। उसने अपना परिचय दिया कि वह एक सुनार हे। वह यहां से दो गांव दूर विलास नगर में रहता है।

 वहां उसकी एक सुनार की दुकान है। जब भी जरूरत हो तब मैं आपकी मदद करूंगा ऐसा उसने वादा किया। और वह ऐसा कह कर चला गया।

एक दिन वैध जंगल में औषधि बनाने के लिए वनस्पति लेने गया। तब उसने देखा कि एक पेड़ गिरा हुआ है। जिसमें एक शेर और एक सांप फस गए हैं। बाघ और सांप ने उसे मदद मांगी।

वैध ने सोचा की यह मदद करने के बाद मार डालेगे तो।

बाघ कहा कि,  “मैं आपको कोई भी नुकसान नहीं पहुँचाउगा। कृपया मेरी मदद कीजिए।”

सांप ने भी यही कहा।

वैधने बाघ की बात मान ली और बाघ को निकाला।

 बाघ ने उसे वादा किया की, “जब भी तुम मुझे बुलाओगे तब मैं तुम्हारी मदद करने के लिए आ जाऊंगा।”

फिर उसने साँप को निकाला। साँप ने उसे भी वादा किया की, “तुम को जब मेरी जरूर पड़ेगी में तुम्हारी मदद करुँगा ।”

बहुत दिनों के बाद वैध फिरसे जंगल में औषधि लेने के लिए गया।

उसके सामने अचानक से तेंदुआ आ गया।

 उसको बाघ का वादा याद आया। उसने बाघ को बुलाया और बाघ से मदद मांगी। बाघ ने उसकी मदद की उसने तेंदुए को डरा कर भगा दिया।

 बाघ मदद करके खुश हुआ बाघ ने उसे गुफा में चलकर कुछ खाने के लिए कहा। वह उसके साथ गुफा में गया।

 उसने वैध को सोना दिया। उसने कहां की यह सोना मुझे एक जंगल में मिला था। जिसे मैं इस गुफा में लाया हूँ। उससे उसे बाघ ने कुछ व्यापार करने को कहा।

तब वह सोने को लेकर दो गांव दूर सुनार के पास गया। वैधने उसको सारी बात बताई और बाघ के ध्वारा दिए गए सोने को दिया।

 उसने कहा कि, “मुझे इससे कितना धन मिल सकता है।”

 सुनार उस सोने को देखकर पता चल गया कि यह सोना तो राजकुमार का है।

राजकुमार जंगल में मर गए थे। और यह सोना राजकुमार का ही है।

राजा ने ऐलान भी किया है की, “जो कोई राजा के राजकुमार या उसका सोना लेकर आएगा उसको पुरस्कृत किया जाएगा।”

वह सोने को परख ना पड़ेगा इसलिए उसे थोड़ा समय रुक ने को कहकर वह घरके पीछे के दरवाजे से भाग गया।

वह राजा के पास गया यह राजकुमार का सोना है और यह वैध के पास मिला है। वैध ने ही राजकुमार को मारा होगा ऐसा मेरा शक है इसलिए उस वैध को सजा देने की बात उसने राजा से कही।

उस वैध को सिपाहीओने राजा के कहने पर पकड़ के जेल में डाल दिया। वैध ने कहा कि उसने कुछ नहीं किया यह सोना तो मुझे बाघने दिया है। पर किसी ने उसकी एक न सुनी।

वह बहुत उदास हो गया। तब उसको सांप के वादे की याद आई। उसने सांप को बुलाया।

सांप को उसने सब बात बताई।

 तब सांप ने कहा कि, “वह रानी को काटेगा और तब तुम रानी का इलाज करने की बात राजा से करना।  तुम्हें मै मेरे जहर का तोड़ दूंगा और जिससे तुम रानी को बचा लोगे। ओर इसके बदले तुम राजा से जेल में से छूटने की बात करना।”

सांप और वैध ने ठीक ऐसा ही किया सांप ने रानी को काटा और वैध ने राजा को कहा कि, “वह रानी को ठीक कर सकता है।”

वैध ने रानी को ठीक कर दिया।

राजा यह देख कर बहुत खुश हो गया। वैध ने इसके बदले जेल में से छोड़ने को कहा और राजा ने उसे छोड़ दिया।

उसके उपरांत भी राजा ने उसे कुछ ओर मांगने को कहा।

तब वैध ने कहा कि, “महाराज! यह सोना मुझे एक बाघ ने दिया था। जो एक जंगल में उसे मिला था। पर उस दुष्ट सुनार ने पुरस्कार के लिए आपसे झूठ बोला और मुझे फसा दिया तो कृपया उसे उसकी सजा दे।”

यह सुनकर राजा को सब समझ आ गया और सुनार को पकड़ कर उसे जेल में डाल दिया।

नैतिक सीख:

इस कहानी के वैध की तरह हमें हर किसी पर और हर किसी के वादे पर भरोसा नहीं करना चाहिए। क्योकि कोई उस दुष्ट सुनार की तरह आप के भरोसे का गलत फायदा उठा सकता है।

Moral of this hindi short story: 

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We should not trust everyone and everyone’s promises like this story is valid. Because someone like that wicked goldsmith can take advantage of your trust incorrectly.


अभिमानी घोड़ा


story 5

एक जंगल था। जहां बहुत सारे जानवर खुशी से मिलजुल कर रहते थे। उस जंगल में तूफान नामका एक घोड़ा रहता था।

 उसके नाम के अनुसार वह तूफान की तरह दौड़ता था। वह उस जंगल का सबसे तेज घोड़ा था। उससे तेज घोडा पूरे जंगल में न था।

परंतु उसे इस बात का बहुत अभिमान था। वह हमेशा अपने तेज दौड़ने के बारे में बताता रहता। वह जब भी कोई जानवर से मिलता तो वह उसे अपने साथ दौड़ने को कहता।

वह है भली भांति जानता था कि कोई भी जानवर उससे तेज नहीं दौड़ सकता है। फिर भी वह उसे अपने साथ दौड़ने को कहता, अगर जानवर मना करता तो वह उसका खूब मजाक उड़ाता।

 उसका एक बहुत अच्छा दोस्त था। वह एक कुत्ता था। उसका नाम किमु था। वह बहुत चालाक और समझदार था। वह अपने मित्र तूफान के अभिमानी स्वभाव के बारे में जानता था ।

वह उसे हमेशा समझाता रहता कि, “तुम किसी चीज में सबसे अच्छे हो, यह बात सही है। पर उस चीज का अभिमान करना और दूसरों को अपने से नीचा दिखाना, यह बात ठीक नहीं है। यह बहुत बुरी बात है। इसीलिए यह अहंकारी स्वभाव को त्यागो और दूसरों को अपने से नीचा मत समझो।”

वह हमेशा इतना सब कहता फिर भी अभिमानी घोड़ा कुछ समझने को तैयार नहीं था।

उसे कहता कि,”मैं दौड़ने में सबसे तेज हूं। यह बात सच है। तो सच को बताने में क्या बुरा है। तुम दौड़ने में तेज नहीं हो यह तुम्हारी गलती है। इसमें मैं क्या करूं? मैं तो सिर्फ सच ही तो बता रहा हूं। वह अपने मित्र किमु की बात मानने को तैयार ही नहीं था।”

एक दिन की बात है। बिल्ली निया का जन्मदिन था। उसने उसके जन्मदिन पर जंगल के सभी जानवरों को बुलाया।

सभी जानवर यानी हाथी, शेर, घोड़ा, कुत्ता और सभी जानवर। उसमें घोड़ा तूफान और कुत्ता किमु भी हाजर था।

बिल्ली का जन्मदिन पर बहुत सारे पकवान बने थे। सब ने अच्छे से पकवान खाए। फिर बिल्ली निया ने‌ सब से पूछा की जन्मदिन पर क्या नया किया जाए?

तो उसमें से चालक कुत्ते किमुने पिकनिक पर कहीं बाहर जाने का सुझाव दिया।

निया को यह सुझाव पसंद आया। उसने एक जगह पसंद की। सब यह जगह जाने के लिए उत्साह के साथ तैयार हुए।

तभी इस बीच तूफान घोड़ा बोला कि आप सब को तो जगह पहुंचने में 4 या 5 घंटे लगेंगे। पर मैं तो सिर्फ 1 घंटे में ही पहुंच जाऊंगा। और यह कह कर वह जोर-जोर से हंसने लगा। वह यह कर उस जगह सबसे पहले पहुंचने के लिए निकल पड़ा।

 सभी प्राणी उस घोड़े का यह व्यवहार देखकर बहुत नाराज हुए। तब वहां उपस्थित चालक किमुने अपने मित्र को सबक सिखाने का तय किया।

 उसने एक योजना सोची। उसने सभी प्राणियों को यह योजना बताई। सब यह योजना के लिए तैयार हो गए।

 दरअसल जिस जगह जाने का था। उस जगह के रास्ते में एक नदी बीच में से पसार होती थी। जिसे पूरा घूम कर जाना पड़ता था।

उस नदी के पूरे घुमके जाने में काफी समय लगता था। किमुने हाथी की मदद से एक पेड़ को गिराया।

वह पेड़ बहुत बड़ा था। उसे नदी के दोनों हिस्सों पर रखवाया। किमुने इस तरह एक पुल का निर्माण किया।

जिसे वह सारे जानवर पुल की मदद से नदी के उस पार पहुंच गए। और इस तरह वह सब जानवर घोड़े से पहले ही उस जगह पर पहुंच गए।

 जब वह घोड़ा उस जगह पर पहुंचा तब वह सारे जानवर बैठकर बातें कर रहे थे। वह घोड़ा यह देखकर कि सब जानवर मुझसे पहले ही पहुंच गए हैं आश्चर्य के कारण कुछ भी बोलने की स्थिति में न था।

तब भी हिम्मत जुटाकर उसने अपने मित्र से पूछा कि, “यह सब कैसे हुआ? तुम लोग मुझसे पहले कैसे पहुंच गए? यह हो ही नहीं सकता!”

 तो किमु बोला कि, “तुमने तुम्हारी दौड़ने की खुबी का प्रयोग किया। हमने हमारी खूबियों को प्रयोग किया है‌।”

 यह सुनकर घोड़े ने अपना मुंह शरम के मारे नीचे झुकाया।

 कुत्ता बोला की, “हमे कभी भी अपनी खूबियों का अहंकार नहीं करना चाहिए। हमें हमेशा यह ध्यान में रखना चाहिए कि तुम्हारे पास जो खूबी है उसी तरह दूसरे के पास भी कोई ना कोई खूबी जरूर होती है।”

 उसके बाद तूफान ने कभी भी शक्ति का अहंकार नहीं किया। वह दूसरे जानवरों के साथ खुशी से रहने लगा।

नैतिक शीख:

हमें कभी भी अपनी शक्तिओ का अभिमान नहीं करना चाहिए। क्योकि हर इंसान के पास कोई न कोई शक्ति या कला होती है। तो हमें कभी भी अपनी शक्ति का घमंड कर दुसरो को निचा नहीं दिखाना चाहिए।

Moral of this hindi short story: 

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We should never boast of our powers. Because every human has some power or art. So we should never boast of our power and let others down.

उद्देश्य:

यह पांच कहानी का संकलन का उद्देश्य विधार्थी को प्रेरणा और बोध देने वाली सर्वश्रेष्ठ कहानी प्रदान करना है। इन कहानी के माध्यम से सभी के जीवन में एक हकारात्मक परिवर्तन आये ऐसी में उम्मीद करता हूँ। यह “Moral stories in hindi for class 8” आर्टिकल पढ़कर अपने लक्ष्य को हासिल कर शके यही मेरी कामना है।


अब आपकी बारी

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