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5 Best moral stories in Hindi for class 7~Hindi stories for class 7

5 Best moral stories in Hindi for class 7~Hindi stories for class 7

I have written 5 best moral stories in Hindi for class 7. There are so many powerful Hindi moral stories for class 7 students with pictures. These Hindi short stories will give you the best moral lessons in the Hindi language. So you will read these five best moral stories in Hindi for class 7.

Moral stories in hindi for class 7

में आपके लिए Hindi moral stories class 7 के लिए लाया हूँ। तो चलो हिंदी कहानियाँ शुरू करते है।

(Hindi moral stories for class 7) Story 1

भगवान भरोसे (Hindi stories for class 7)


बहुत समय पहले विजयनगर नाम का एक नगर था। उसमें कई गांव थे। जिसमें रामपुर नाम का एक गांव था। उस गांव में शिव का एक सुंदर मंदिर था। उस मंदिर के पुजारी का नाम रामेश्वर था।

गांव के सब रामेश्वर को बहुत मान पूर्वक व्यवहार करते थे। क्योंकि वह उस गांव के मंदिर का पुजारी था। परंतु वह बड़ा आलसी था। उसके साथ ही वह हमेशा भगवान भरोसे रहता था। और वह सब को भगवान भरोसे रहने को कहता थे।

 वह कहता कि मैं भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त हूं। मैंने भगवान की जीवन भर बहुत पूजा कि है, इसीलिए मैं कोई भी चिंता नहीं लेता हूं।

क्योंकि मुझे अपने भगवान पर भरोसा है। वह मुझे कोई भी परेशानी में से निकालेंगे। कई लोग उनको इतना भी भगवान भरोसे ना होने को कहते। परंतु वह किसी की बात नहीं सुनता था।

एक बार की बात है। रामपुर में एक बहुत बड़ी मुसीबत आ गई। दरअसल बात ऐसी थी कि रामपुर में एक बहुत बड़ा बांध था। वह बांध की दीवाल अब बहुत कमजोर हो गई थी। बांध की दीवार कमजोर होने के कारण नदी का पानी उसमें से बाहर निकल रहा था।

इस परेशानी का समाधान निकालने के लिए उस गांव के सरपंच ने एक सभा बुलाई। उस सभा में मंदिर का पुजारी रामेश्वर भी था।

सरपंच ने कहा कि, “बांध की दीवाल अब बहुत कमजोर हो गई है। और उसमें से पानी निकल रहा है। तो हमें इसका कोई ना कोई समाधान निकालना ही होगा।”

सभा में से किसी ने इस बारे में जिलाधिकारी को बताने को कहा। जिससे वह इसका कोई समाधान दे सकें। सरपंच को यह बात पसंद आयी। और सरपंच और गांव के दो-तीन लोग जिलाधिकारी से इस बारे में बात करने के लिए गए।

जिलाधिकारी को पूरी बात बताई। तब जिलाधिकारी और कई ओर बड़े अफसर ने बांध की जांच की।

Moral stories in Hindi for class 9

जांच के बाद जिलाधिकारी ने सरपंच से कहा कि, “इस बांध की दीवाल अब बहुत ही कमजोर हो गई है। इसकी वजह से अब नदी का पानी कभी भी आपके गांव में आ सकता है और इसके कारण आपका गांव डूब जाएगा। इसलिए जितना हो सके उतनी जल्दी आप गांव वालों को गांव खाली करने के लिए कहे।”

 सरपंच ने ठीक ऐसा ही किया। उसने किसी के द्वारा यह सारी बात गांव वालों तक पहुंचाई‌। सारे गांव वालों यह बात सुनकर घबरा गए।

Moral stories in hindi for class 7 students

 सारे गांव वालों अपना-अपना कीमती सामान लेकर गांव छोड़कर जाने लगे। परंतु इस बीच रामेश्वर शिव मंदिर के आसपास आंगण में बैठा था। वहां जाते हुए लोगों ने उसे गांव छोड़ने के लिए कहा।

Hindi moral stories for class 7 students

परंतु रामेश्वरने उनसे कहा की, “मुझे कुछ नहीं होगा मुझे अपने भगवान पर पूरा भरोसा है। मैं समस्या से भागने वालों में से नहीं हूं।” और ऐसे ही वह बैठा रहा।

 गांव में धीरे धीरे-धीरे नदी का पानी घुस रहा था। कुछ समय बाद अब पानी पुजारी के पैरों को छु रहा था। तब भी वह भागने का सोच भी नहीं रहा था।

उसी समय एक घुड़सवार जा रहा था। उससे पूजारी को अपने घोड़े पर बैठने को कहा।

 उसने कहा कि, “आप जल्दी से जल्दी मेरे घोड़े पर बैठ जाइए। क्योंकि जल्द ही गांव डूबने वाला है।” उसने उस घुड़सवार की भी बात न मानी। वह तब भी बैठा रहा।

5 से 6 घंटे बाद अब पूरा गांव डूब चुका था। क्योंकि नदी का सारा पानी अब गांव में आ गया था। वह पुजारी मंदिर के टोच पर धजा पकड़कर खड़ा था। वह बचाने को चिल्ला भी नहीं रहा था।

तभी वहां से एक हेलीकॉप्टर उसको बचाने के लिए आया। हेलीकॉप्टर में से एक फौजी ने रस्सी उस पुजारी की तरफ रस्सी फेंकी और फौजी ने कहा कि, “इस रस्सी को पकड़कर ऊपर आ जाओ।”

 उसने उस फौजी की बात भी ना मानी‌। उसने कहा कि, “मुझे अपने भगवान पर पूरा भरोसा है कि वह मुझे बचाने जरूर आएंगे।” ऐसा कह कर वह धजा पकड़ कर खड़ा रहा।

कुछ समय बाद सारा नदी का पानी पूरे गांव में फैल चुका था‌। और इसी के साथ ही वह पूजारी भी डूब कर मर गया था।

वह मर कर भगवान शिव के पास पहुंचा। उसने भगवान शिव से नाराज़ होकर बड़े गुस्से से बोला कि, “मैंने पूरी जिंदगी आपकी सेवा में लगा दी। मैंने आपकी पूरे मन से सेवा की। मैं आपके भरोसे ही आखिर तक उस गांव में धजा पकड़कर खड़ा रहा। पर फिर भी आप मुझे बचाने के लिए वहां नहीं आए, ऐसा क्यों?”

 भगवान बोले की मैं जानता हूं की, “तुमने मेरी बहुत मन से सेवा की है। मैं तुम्हें बचाने के लिए आया था।”

वह पुजारी चौक कर बोला कब?

तब भगवान शिव बोले, “मैं तुम्हें तीन बार बचाने को आया। पर तुम माने ही नहीं।

 पहली बार उन लोगों के रूप में, दूसरी बार घुड़सवार के रूप में और तीसरी‌ और आखिरी बार में उस फौजी के रूप में आया था। पर तब भी तुमने अपने आप को बचाना ना समझा।”
 वह पूजारी बोला कि, “वह आप नहीं थे‌। वह तो सामान्य लोग ही थे।”

तब भगवान बोले कि, “मैं किसी को बचाने के लिए नहीं आता। उनको खुद ही अपने आप को बचाना होता है। मैं तो सिर्फ बचाने के लिए झरिया भेज सकता हूं।

खुद को बचाना ना बचाना यह आपके हाथ में है। अगर मैंने महाभारत में शस्त्र उठाए होते तो मैं चुटकियों में महाभारत को खत्म कर सकता था।

 पर फिर भी मैंने अपने शस्त्र नहीं उठाए। इसीलिए मैं तुम्हें बचाने नहीं आया। पर बचाने के लिए जरिए भेजे जो तुमने ठुकरा दिए। इसीलिए यह तुम्हारी गलती है।”

सीख:

 भगवान पर विश्वास रखना बहुत अच्छी बात है। पर भगवान भरोसे बैठे रहना बहुत घातक है। जैसा कि आपने इस कहानी में देखा कि वह पुजारीने जीवनभर भगवान की सेवा की। तब भी वह मर गया क्योंकि समस्या का समाधान और समस्या का सामना इंसान को ही करना पड़ता है। भगवान कभी भी आपकी मदद नहीं करते।

आपको अपनी मदद खुद ही करनी पड़ती हैं। हमें हमेशा यह बात को ध्यान में रखना चाहिए कि भगवान सिर्फ रास्ता दिखा सकते हैं उस रास्ते पर चलना तो आपको ही पड़ता है।

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Moral of this short hindi story:

Moral stories in Hindi for class 7, Hindi story with moral for class 7, Hindi moral stories for class 7: It is a great thing to have faith in God. But sitting on the belief that God will help me without doing any work for yourself is very dangerous.

As you saw in this story, the priest served God throughout his life. Even then he died because the human has to solve the problem and face the problem. God never helps you. You have to help yourself. We should always keep in mind that God can only show the way, you have to follow that path.

(Hindi story with moral for class 7) Story 2

पिंकू, गज्जू और शालू (Moral Hindi Stories for class 7)


एक जंगल था। जिसमें वनराज नाम का एक शेर रहता था। वह शेर उस जंगल का राजा था। सब उसको बहुत मान देते थे।

वह शेर वनराज का एक प्रिय हाथी था। जिसका नाम गज्जू था। गज्जू भी वनराज शेर से बहुत प्रेम करता था। शेर‌ ने गज्जू की देखभाल के लिए एक सियार को रखा था। जिसका नाम शालू था।

शालू गज्जू का बहुत ही अच्छे से ध्यान रखता था। वह समय पर खाना खिलाता था। वह उसके साथ खेलता था। दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे।

एक दिन की बात है। उस जंगल में एक कुत्ता आया। उसी समय शालू सियार गज्जू के लिए घास लेकर जा रहा था। उसने कुत्ते को आते हुए देखा और पूछा कि, “तुम कौन हो? तुम इस जंगल के तो नहीं लगते?”

उस कुत्ते ने कहा कि, “मेरा नाम पिंकू है। मै दूसरे जंगल में आया हूं।”

शालू बोला की, “उस जंगल से यहां क्यों आए हो?”

उस कुत्ते ने जवाब दिया कि, “मेरे उस जंगल में कोई भी दोस्त नहीं थे। मुझे वहां बहुत ही अकेला महसूस होता था। इसीलिए मैं इस जंगल से आया हूं।”

यह बात सुनकर शालू बोला, “आज से तुम मेरे दोस्त हो। इसीलिए अब तुम्हें कभी भी अकेला महसूस नहीं होगा।”

पिंकू यह बात सुनकर बहुत खुश हो गया।

 उसने शालू के हाथ में घास देखी। उसने उससे कहा की, “यह घास लेकर कहां जा रहे हो?” शालू बोला, “मैं अपने एक दोस्त के लिए यह ले जा रहा हूं। यह घास उसी के लिए है। मैं तुम्हें भी अपने दोस्त से मिलवाता हूं। उसका नाम गज्जू है।”

 पिंकू यह नाम सुनकर बोला, “किसी बड़े प्राणी का नाम लगता है।” शालू यह बात सुनकर हस पडा।

 फिर वह दोनों गज्जू के पास पहुंचे। गज्जूने शालू के साथ पिंकू को देखा और बोला, “यह कौन है?”

 तो शालू ने जवाब दिया कि, “यह आज से मेरा दोस्त है। इसका नाम पिंकू है।”

पिंकू ने गज्जू को बोला की, “आपका नाम बहुत ही अच्छा है।” यह बात सुनकर गज्जू बड़ा प्रसन्न हुआ और उसने कहा की, “तुम्हारा नाम भी बहुत अच्छा है।”

इसी के साथ पिंकू और गज्जू भी एक दूसरे के दोस्त बन गए।

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शालू ने पिंकू से कहा कि, “वनराज शेर अभी जंगल में नहीं है। वह जंगल के किसी काम से बाहर गए हैं। वह 2 दिन बाद जंगल में आएंगे। तो हम 2 दिन बाद ही शेर से तुम्हारे रहने के लिए बात कर पाएंगे। मुझे विश्वास है की शेर तुमको यहां रहने देंगे।”

यह बात सुन कर का पिंकू बहुत खुश हुआ।

पिंकू और गज्जू दोनों एक साथ रहने लगे। वह दोनों एक साथ खेलते बैठते और बातें करते।

मानो की गज्जू को एक भाई मिल गया हो। वह सारा दिन पिंकू के साथ रहने लगा। पिंकू को भी गज्जू के साथ रहने में बहुत मजा आता था।

 इन दोनों की बढ़ती दोस्ती शालू को पसंद ना आई। वह इन दोनों की दोस्ती से जलने लगा। क्योंकि गज्जू उसका दोस्त था परंतु गज्जू शालू से ज्यादा पिंकू के साथ रहने लगा। और यह बात शालू को बिल्कुल पसंद नहीं आई।

 इसीलिए शालू पिंकू को उसके जंगल वापस भेजने के लिए कोई योजना सोचने लगा की, “मैं कैसे पिंकू को उसके जंगल वापस भेजूं।” तो सोचते सोचते उसको एक योजना मिली।

 वह भागते-भागते पिंकू के पास गया तब पिंकू अकेला था। पिंकू को शालू ने कहा कि, “तुम यह जंगल छोड़कर अभी इसी वक्त अपने जंगल भाग जाओ!”

 यह सुनकर आश्चर्य से पिंकू बोला, “ऐसा क्यों? वह तो बताओ।”

 तब शालू ने कहा कि, “शेर जंगल में आ गए हैं। उनसे मैंने तुम्हारे रहने की बात की, तब वह बहुत भड़क गए। वह बहुत गुस्से में है। उसने तुम्हें रहने के लिए साफ मना कर दिया है। अगर तुम अभी नहीं गए तो तुम मारे जाओगे।”

 ऐसी बात सुनकर पिंकू बहुत डर गया। वह अपने जंगल में वापस चला गया।

 शालू की योजना सफल हो गई थी। इसी बात पर शालू भी बहुत खुश था। परंतु शालू के पास गज्जू आया और कहा की, “पिंकू कहां है?”

तब शालू ने कहा कि, “पिंकू तो उसके जंगल में वापस चला गया है। क्योंकि उसको अपने जंगल की बहुत याद आ रही थी।”

यह बात सुनकर गज्जू को बहुत बुरा लगा। इतना बुरा लगा कि उसने घास न खाई। शालू इसे एक दिन का दर्द समझ कर इस पर ज्यादा ध्यान ना दिया।

Moral stories in Hindi for class 8

 परंतु गज्जू ने दूसरे और तीसरे दिन भी खाना ना खाया। वह घास ना खाने की वजह से दुबला हो गया था। शालू अब बहुत डरने लगा। क्योंकि ऐसी हालत में अगर उसे शेर ने देख लिया तो वह मारा जाएगा।

 वह भागता-भागता दूसरे जंगल में पिंकू को ढूंढने गया। उसने कई जंगल में पिंकू को ढूंढा। पर पिंकू उसे नहीं मिला।

 आखिर एक जंगल में पिंकू को शालू ने ढूंढ लिया। पिंकू को देखते ही शालू् पिंकू के पैरों में गिर कर माफी मांगने लगा।

उसे माफी मांगता देख पिंकू तुरंत बोला कि, “दोस्त! यह क्या कर रहे हो? तुम मुझसे माफी क्यों मांग रहे हो?”

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तब शालू ने पूरी बात बताई। और कहा की, “गज्जू और मैं कई सालों से एक दूसरे के दोस्त हैं। पर पिंकू तुम्हें गज्जू के साथ खेलते देख और गज्जू को भी तुम्हारे साथ ज्यादा समय रहने की वजह से मैंने यह सब किया। इसके लिए मुझे माफ कर दो।

 गज्जू ने 2 या 3 दिनों से कुछ भी नहीं खाया है। इसीलिए वह बहुत दुबला हो गया है। इसलिए तुम मेरे साथ जंगल चलो। पर कृपया यह सारी बात गज्जू को मत बताना। क्योंकि वह मुझसे कभी भी बात नहीं करेगा।

 यह सब सुनकर पिंकूने यह बात ना बताने का शालू से वादा किया। शालू गज्जू को लेकर जंगल में आया। पिंकू को शालू के साथ आते देख गज्जू की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने पिंकू के आने से घास भी खाई। वह सब अच्छे से एक-दूसरे के साथ रहने लगे।

सीख:

जलन एक ऐसा मनोभाव है जो कितने भी मजबूत रिश्तो को तोड़ सकता है जैसा कि आपने इस कहानी में देखा कि गिल्लू और चालू कितने समय के दोस्त थे परंतु शालू के मन में आई जलन की भावना की वजह से उनकी दोस्ती टूट सकती जी परंतु पिंकू ने शालू की यह करतूत के बारे में गिल्लू को कुछ भी नहीं बताया इसी की वजह से उनकी सालों पुरानी दोस्ती बच गई

तो जलन ऐसी भावना है जो आपके सालों पुरानी रिश्तो में दरार डाल देती है। तो इस भावना से जितना हो सके उतना दूर रहना चाहिए क्योंकि इसका परिणाम हमेशा बुरा ही होता है।

Moral of this short hindi story:

Moral stories in Hindi for class 7, Hindi moral stories for class 7, Hindi story with moral for class 7: Jealousy is such an emotion that can break any strong relationship. As you saw in this story how long Gillu and Chalu were friends, but Shalu’s feelings of jealousy could break their friendship.

But Pinku Nothing told Shallu about this act of Shalu, due to which his friendship survived his years-old friendship. So jealousy is such a feeling that breaks your old age relationship, so you should stay away from this feeling as much as you can because it always results in bad.

Story 3

रामदास और जादुई पेड़


एक गांव था। जिसका नाम वीरपुर था। उस गांव में लोग बड़े अच्छे से रहते थे। परंतु उस गांव में रामदास नाम का एक स्वार्थी और बुरा इंसान रहता था।

 वह बहुत बोलता था। वह दूसरे काम कराता था। और बदले में उनको पैसे ना देकर दुखी करता था। वह लोगों को बेवकूफ बनाता था। और अपना काम निकलवाता था। सभी लोग उससे बहुत नाराज थे।

एक दिन की बात है। रामदास के पास गाय-भैंसें थे। अचानक ही उनको खाना खिलाने के लिए और रहने के लिए एक खेत चाहिए था।

खेत सिर्फ 4 महीने के लिए चाहिए था। रामदास गांव के सरपंच के पास मदद के लिए गया। उसने सारी बात बताई और उनके खेत को 4 महीने के लिए देने को कहा।

सरपंच बड़ा दयालु और अच्छा इंसान था। उसने उसे 4 महीने के लिए अपना खेत दे दिया। उससे सरपंच ने कहा की, “मैं तुमसे 4 महीने के बाद अपना खेत वापस ले लूंगा।” उसमें रामदास ने हां कहा।

Moral stories in Hindi for class 9

 वह सरपंच के खेत में जाकर काम करने लगा। 2 या 3 घंटे काम करने के बाद वह बहुत थकान महसूस करने लगा। उसको लगा की यह काम मैं नहीं कर पाऊंगा।

इसलिए मुझे किसी की मदद चाहिए। वह गांव वालों के पास जाकर पहुंचा। उसने गांव वालों से कहा की, “जो भी मेरे लिए 4 महीने तक खेत में काम करेगा उसको मैं 10,000 रुपये दूंगा।”

यह बात सुनने के बाद सारे गांव वालों ने किसी भी कीमत पर उसके लिए काम करने से मना कर दिया। क्योंकि सारे गांव वाले उसके स्वार्थी स्वभाव को जानते थे।

वह दूसरे गांव से दो मजदूरों को लेकर आया। वह खेत में उनसे काम करवाने लगा। वह मजदूर बहुत ही ईमानदार और महेनती थे। उन्होंने बड़ी मेहनत से काम किया।

4 महीने बाद खेत का सारा काम पूरा हुआ। खेत में से अनाज पैदा हुआ। उनमें से कुछ अनाज अपने गाय-भैंसों के लिए रखा और बचा हुआ सारा अनाज को बेचकर उसने बहुत पैसे कमाए। वह बहुत खुश हुआ।

सारा काम खत्म होने के बाद उसने उन मजदूरों को 2 दिन की छुट्टी देकर आराम करने को कहा। 2 दिन बाद दोनों मजदूर रामदास से उनकी मजदूरी के पैसे लेने आए।

तब रामदास बोला की, “तुम कौन हो? मैंने तुम्हें पहले कभी भी नहीं देखा? मैं तुम्हें जानता ही नहीं तो मैं तुम्हें पैसे क्यों दूं?”

 यह बात सुनकर बहुत दोनों मजदूर आश्चर्य के मारे कुछ बोल ही नहीं पा रहे थे।

फिर भी उनमें से एक मजदूर हिम्मत करके बोला की, “आप यह क्या कह रहे हो। हमने आपके लिए 4 महीने तक मजदूरी की और उनमें से पका हुआ अनाज बेचकर आपने पैसे कमाए। तब भी आप पैसे देने के वक्त ऐसी बात कर रहे हो।”

पर वह रामदास ना माना। आखिर वह मजदूर थक हार कर अपनी मेहनत की कमाई छोड़कर अपने गांव वापस चले गए।

Moral stories in Hindi for class 8

रात को जब रामदास सो रहा था। तब उसके सपने में गणेशजी आए। गणेशजी ने कहा की, “रामदास तुमने आज तक कई लोगों को बेवकूफ बनाया है और उनकी मेहनत की कमाई खाई है। इसीलिए मैं तुम्हारे घर के पास एक पेड़ लगाता हूं।

जब भी तुम कोई बुरा काम करोगे तब उनमें से पौधे गिर जाएंगे। वह पौधे सिर्फ पौधे नहीं होगे, तुम्हारे जिंदगी के दिन होगे जितने पौधे नीचे गिरेंगे उतने तुम्हारे जिंदगी के दिन कम होगे।”

 ऐसा बोलकर गणपति जी चले गए। उसने जब डर के मारे आंख खोली और भागकर अपने घर के पास गया। वहां जाकर देखा तो एक बहुत घना पेड़ था। उसमें बहुत सारे पौधे थे।

 उसने सोचा की, “उसमें से कुछ पौधे गिर भी जाए तो भी बहुत सारे पौधे हैं।”

 यह सोचकर वह अपने घर जाकर सो गया। सुबह उठकर हमेशा की तरह उसने बुरे काम शुरू कर दिए।

उसी बीच सरपंच उसके घर आए। उन्होंने कहा की, “तुम्हारा काम अब तक खत्म हो गया होगा तो मैं तुमसे अपना खेत वापस लेने आया हूं।”

 रामदास बोला की, “कौन सा खेत? मेंने आपसे कोई भी खेत नहीं लिया है! मैं जिस पर 4 महीने से मजदूरी कर रहा हूं। वह मेरा खेत है आपका नहीं!”

यह बात सुनकर सरपंच बड़े दुख के साथ वापस चला गया। रामदास जब घर के बाहर आकर उस पेड़ को देखा तो वह घबरा गया।

 उस पेड़ के सारे पौधे नीचे गिर चुके थे। सिर्फ उनमें से एक ही पौधा बचा था। इसका मतलब है की उसकी जिंदगी में सिर्फ एक ही दिन बचा था। उसको अपने किए गए बुरे कामों पर बड़ा दुख हुआ। उसको लगा की मैंने जिंदगी भर लोगों को बेवकूफ बनाया है उनका दिल दुखाया है।

तो आज मैं अपने बचे हुए आखरी दिन में लोगों से माफी मांग कर अपना प्रायश्चित करूंगा।

वह पहले सरपंच के घर गया। उसने सरपंच के पैरों  में गिरकर माफी मांगी। और उनका खेत उसे लौटा दिया। सरपंच ने उसे माफ कर दिया।

बाद में वह दूसरे गांव जाकर उन दो मजदूरों के पास गया। मजदूर को रामदास ने हाथ जोड़कर माफी मांगी। और उनकी मेहनत की कमाई और साथ ही कुछ ओर पैसे दिए। मजदूरों ने भी रामदास को माफ कर दिया।

 बाद में वह हर एक गांव वालों से हाथ जोड़कर माफी मांगने गया। और साथ ही उनकी मेहनत की कमाई भी वापस लौटाई, जो उसने उन लोगों को नहीं दी थी। सब गांव वालों ने उसे माफ कर दिया।

यह सब करने के बाद जब वह घर लौटा तो उसने देखा की वह पेड़ घना हो चुका है। उस पेड़ पर पौधे फिर से आ गए हैं।

वह यह देख कर बहुत खुश हुआ। उसको समझ आ गया कि भगवान ने उसे जीने का एक दूसरा मौका दिया है। तो बाद में वह हर किसी के साथ बड़े अच्छे से रहने लगा और गांव वाले भी उसके साथ अच्छे से रहने लगे।

सीख:

लोगों को बेवकूफ बनाना, उनको दुखी करना, उनकी मदद के बदले धोखे देना, यह सब एक दुर्जन  व्यक्ति के लक्षण है जो इस कहानी में रामदास के थे। अगर रामदास सही समय पर सुधरा न होता तो उसको अपने दुष्कर्म का फल जरूर भोगना पड़ता।

इसलिए हमें हमेशा अच्छे काम करते रहना चाहिए क्योंकि अच्छे व्यक्ति को समस्या आने पर हर कोई मदद करता है परंतु एक दुर्जन व्यक्ति पर बड़ी से बड़ी समस्या आने पर भी कोई भी मदद नहीं करता।

Moral of this short hindi story:

Hindi story with moral for class 7, Moral stories in hindi for class 7, Hindi moral stories for class 7: Fooling people, making them miserable, cheating in return for their help is all a symptom of a Bad person who belonged to Ramdas in this story.

Had Ramdas not improved at the right time, he would have had to bear the fruits of his misdeeds.

That is why we should always keep doing good work because everyone helps when a good person encounters a problem, but no one helps even when a bad person faces the biggest problem.

Story 4

शिकारी और बाज (Hindi stories class 7)


एक गांव में एक शिकारी रहता था। वह शिकार कर अपना जीवन गुजारता। एक दिन की बात है वह जंगल में शिकार करने के लिए गया था‌।

 वहां उसने एक पेड़ पर एक बाज को देखा। बाज को देखकर उसने सोचा कि अगर मैंने इसे पकड़ लिया तो आज खाने में मजा आ जाएगा।

 उसने धीरे से उस पेड़ के पास जाकर जाल उस बाज पर डाली। जाल डालने की वजह से वह बाज पकड़ा गया। शिकारी उस बाज को पकड़ कर अपने घर की तरफ जाने लगा।

बाजने उस शिकारी से कहा की, “तुमने मुझे क्यों पकड़ा? तुम मुझे पकड़ कर क्या करोगे?”

 तब शिकारी बोला की, “मैं तुम्हें पकड़ कर खाऊंगा।” यह सुनकर बाज बहुत डर गया परंतु बाज बहुत चालाक था। उसने अपने डर को अपने मस्तिष्क पर हावी ना होने दिया। वहां उसने तुरंत अपने आप को शांत कर दिया। और जाल में से निकलने के बारे में सोचने लगा।

अपने घर के तरफ जाते वक्त उस शिकारी को बहुत प्यास लगी। उसने एक नदी के पास जाकर नदी का पानी पिया। और कुछ वक्त वही नदी के पास ही आराम करने को सोचा। उसने बाज को अपने पास जमीन पर रखा। और जमीन पर लेट गया। वह लेट कर आराम करने लगा।

Moral stories in hindi for class 7

 बाज ने उसे कहा की, “मैं आज मरने वाला हूं। इसीलिए मैं तुम्हें दो सीख देना चाहता हूं। मुझे यकीन है कि यह सीख तुम्हारे जीवन में कुछ काम आएगी।”

 शिकारी ने सीख देने को कहा। बाज ने कहा की, “दो सीख हमेशा अपने जीवन में याद रखना। पहली कभी भी किसी पर बिना प्रमाण के विश्वास मत करना और दूसरी गलती हो जाने पर खेद कर समय बिगाड़ने के बदले उससे कुछ सीखने का प्रयत्न करना।”

शिकारीने उन दोनों सीख पर कुछ ज्यादा ध्यान ना दिया।

बाजने कहा की, “तुम मुझे क्यों पकड़ना चाहते हो? तुम्हें खाने के लिए तो ओर भी चीजें मिलेगी।”

 उस शिकारी ने कहा की, “मैं बहुत गरीब हूं अगर मेरे पास पैसा होता तो मैं तुम्हे कभी भी नहीं पकड़ता।”

उस बाज ने कहा की, “अगर मैं तुम्हें अमीर बना दूं। तो तुम मुझे जाने दोगे?”

 वह शिकारी आश्चर्य से बोला, “हां! क्यों नहीं?”

 तब बाज ने कहा की, “मैं एक खजाने के बारे में जानता हूं। जो मैंने बहुत साल पहले उड़ते हुए देखा था। अगर मैं मर गया तो वह खजाना किसी के काम ना आएगा।

उससे अच्छा तो मैं यह खजाना तुम्हे ही दे दु। जिसे तुम धनवान बन जाओगे और साथ ही मुझे भी छोड़ दोगे।‌ इसीलिए तुम मुझे जाल में से निकालो। मैं तुम्हें उस खजाने के पास ले जाऊंगा।”

 शिकारी लालच में आकर उसको जाल में से निकाल दिया। जाल में से निकलते ही वह बाज एक पेड़ के सबसे ऊपर जाकर बैठ गया। उस शिकारी ने उसे खजाने के पास ले जाने को कहा।

 उस बाज ने कहा की, “मैंने तुम्हें कुछ समय पहले ही दो सीख दी थी। उसमें से पहले सीख थी की कभी भी किसी पर बिना प्रमाण के यकीन नहीं कहना चाहिए।

पर तुमने मेरी शीख को ध्यान में नहीं लिया। मैं किसी भी खजाने के बारे में नहीं जानता। मैंने तो बस अपनी जान बचाने के लिए तुमसे झूठ बोला है।” वह शिकारी बड़ा उदास हो गया।

 तभी वह बाज बोला की, “मैंने तुम्हें दूसरी सीख भी दी थी कि कभी भी अपनी गलतियों पर खेद करने के बजाए उसमें से सीखने का प्रयत्न करो।” वह शिकारी को उसकी सीख समझ में आ गई।

सीख:

हम इस छोटी सी कहानी से भी बहुत कुछ सीख सकते हैं। इस कहानी से हमें एक बहुत जरूरी सीख मिलती है। जब इंसान लालच में आता है तो उसकी बुद्धि काम करने बंद हो जाती है और जैसा आपने इस कहानी में देखा कि वह शिकारी जैसे ही लालच में आया, इसे उसकी बुद्धि बंद हो गई।

उसने यह सोचना भी जरूरी न समझा की अगर मैंने इसे छोड़ दिया और यह उड़ गया तो इसी को ही तो लालच कहते हैं। एक बार किसी के सिर पर चढ़ जाए तो वह सोचने-समझने के काबिल ही नहीं रहता। इसीलिए हम को भी अपने लालच पर नियंत्रण रखना चाहिए।

दूसरी जरूरी सीख यह मिलती है कि हमें बड़ी से बड़ी विपत्ति आने पर जितना हो सके शांत रहने का प्रयत्न करना चाहिए। जैसे इस कहानी में उस बाज ने विपदा आने पर किया और अपने मन को शांत कर भागने का रास्ता निकाला।

Moral of this short hindi story:

Hindi story with moral for class 7, Moral stories in hindi for class 7: We can also learn a lot from this short story. We get a very important lesson from this story.

When a man comes to greed, his intelligence stops working, and as you saw in this story that as soon as the hunter came to greed, it lost his intelligence.

He did not think it necessary to think that if I left it and it flew, then it is called greed. Once on one’s head, he is incapable of thinking and understanding. That is why we should also control our greed.

The second important lesson is that we should try to remain as calm as possible in the event of the greatest calamity. Like the falcon in this story, when the calamity came and calmed his mind and found a way to escape.

Story 5 (hindi stories for class 7)

बगुले और तेंदुआ


एक जंगल था। जिसमें एक तालाब था। उस तालाब में बहुत सारे बगुले रहते थे। उनके बच्चे तालाब के किनारे हमेशा खेलते। परंतु कई दिनों से उनके बच्चों को तेंदुआ पकड़ कर अपने साथ ले जाता और खाता था।

 बगुलों ने इस बारे में सोचने के लिए एक मीटिंग बुलाई। बगुलो के सरदार ने कहा की, “कई दिनों से एक तेंदुआ हमारे बच्चों को खेलते समय पकड़ कर ले जाता है। और बाद में उसे खा लेता है। इससे हमारे बच्चों पर मौत का खतरा रहता है। साथ ही हमारे कई बच्चे मर गए हैं।”

हमें इस तेंदुए का कोई ना कोई समाधान ढूंढना पड़ेगा। तभी कई बगुले यह कहने लगे की, “हम इस तेंदुए का क्या कर सकते हैं? हम उस तेंदुए के मुकाबले बहुत कमजोर है।”

 इस बात पर सरदार ने कहा की, “अपने आप को कमजोर मानना ही सबसे बड़ी कमजोरी है।” हां! यह सही है कि तेंदुआ बहुत शक्तिशाली प्राणी है।

मगर हम मिलकर कुछ करें तो तेंदुए का मुकाबला जरूर कर सकते हैं। तभी सभी बगुले मिलकर उस तेंदुए का मुकाबला करने के लिए योजना सोचने लगे।

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तभी सरदार को एक योजना सूजी। उसने कहा की, “तेंदुए जैसे प्राणी शिकार को पकड़ने के बाद उसे कभी खाते नहीं है। पर पेड़ के ऊपर डाल पर ले जाकर छुपा देते हैं।

 जिसे वह शांति से बैठ कर खा सके और कोई प्राणी भी उसे चुरा ना ले। क्योंकि ज्यादातर जंगल के जंगली प्राणी पेड़ पर चढ़ नहीं सकते।

तो हम बगुले है, हम उस डाल पर जाकर उसी शिकार को नीचे गिरा देंगे। और नीचे खड़े लकड़बग्घे उस शिकार को मिल कर खा लेंगे। जिससे वह शिकार करने के बावजूद भी भूखा रहेगा।”

 यह योजना सबको अच्छी लगी। बगुले और बगुले के सरदार ने लकड़बग्घे को यह योजना बताई।

लकड़बग्घों को यह योजना बहुत अच्छी लगी। इस योजना के मुताबिक ही उन्होंने किया। तेंदुए ने शिकार को पकड़कर पेड़ की डाल पर रख दिया। आकाश में उड़ रहे बगुले ने यह देख लिया और तेंदुए के जाने के बाद उन्होंने शिकार को नीचे फेंक दिया।

नीचे खड़े लकड़बग्घे शिकार को मिलकर खाने लगे। जब तेंदुआ पेड़ पर गया तो उसको अपना शिकार नहीं मिला। उसको लगा कि मैंने अपने शिकार को ठीक से नहीं रखा होगा। इसकी वजह से वह गिर गया होगा और किसी ने उसे खा लिया होगा।

वह अगली बार शिकार पर गया। उस बार भी उन बगुले ने वैसा ही किया। उन्होंने शिकार को नीचे गिरा दिया। और नीचे खड़े सारे लकड़बग्घो ने मिलकर शिकार को खा लिया।

तेंदुआ शिकार खाने के लिए पेड़ पर चढ़ा तो उसको शिकार इस बार भी नहीं मिला। उसने सोचा की, “मैंने तो ठीक से ही शिकार रखा था तो वह गया कहा?”

 ऐसे ही तीन-चार‌ बार शिकार को उन बगुले ने नीचे फेंक दिया। उन लकड़बग्घों की तो पार्टी हो गई थी। बिना शिकार किए उनको अच्छा खाना मिल रहा था।

जबकि दूसरी ओर तेंदुआ शिकार करने पर भी वह शिकार को खा नहीं पा रहा था। वह बहुत भूखा हो गया था। वह बहुत कमजोर भी हो गया था। वह सिर्फ पानी पीकर अपनी भूख को शांत कर रहा था।

 उसने लकड़बग्घों को उसका शिकार खाते हुए देख लिया। फिर भी वह उससे अपना शिकार ले नहीं सकता था। क्योंकि उसमें अब इतनी ताकत नहीं बची थी कि वह उन लकड़बग्घों से अपना शिकार छीन सके। पर फिर भी उसने उनमें से एक लकड़बग्घे को पकड़ लिया।

उसने उस लकड़बग्घे को कहा की, “मैं तुम्हें नहीं मारूंगा पर उसके बदले मुझे यह बताओ कि मेरा शिकार तुमको कौन दे रहा है?”

 तब उस लकड़बग्घे ने उसे सारी बात बताई कि कैसे बगुले तुम्हारा शिकार नीचे फेंक देते हैं। और हम मिलकर तुम्हारा शिकार खा लेते हैं।

यह बात से तेंदुआ बहुत गुस्सा हुआ। वह तालाब के किनारे जाकर उस बगुले को चेतावनी दी कि अगली बार उन्होंने ऐसा किया तो वह उनको नहीं छोड़ेगा‌।

उसकी चेतावनी ने उन बगुलों पर कोई खास प्रभाव नहीं डाला। वह बगुले हर बार की तरह उसका शिकार पेड़ से नीचे फेंकने लगे। वह तेंदुआ अब बहुत कमजोर हो गया था।

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इसीलिए वह शेर के पास गया। शेर ने अपनी सभा बुलाई। उन्होंने बगुले के सरदार को भी वहां बुलाया। शेर ने पूछा की, “तुम क्यों तेंदुए का शिकार को नीचे फेंक देते हो?”

 तब बगुले के सरदार ने जवाब दिया की, “जब हमारे बच्चे तालाब के किनारे खेल रहे होते हैं तो वह उसे खा लेता है तो वह क्यों ऐसा करता है?

जब वह जंगल में शिकार कर हमारे तालाब में पानी‌ पीने आता है। तब हम तेंदुए को कुछ नहीं करते तो वह हमारे बच्चों को क्यों मार देता है?”

 तेंदुआ गुस्से से बोला की,‌‌ “शिकार करना यह मेरा स्वभाव है।”

 तब बगुले के सरदार ने कहा की, “तब भुखे रहना भी तुम्हारा स्वभाव बना दो।”

इस बात से तेंदुआ क्रोध से लाल हो गया। इस समस्या का शेर ने समाधान निकाला।

उसने तेंदुए से कहा की, “तुम चाह कर भी बगुलों का कुछ नहीं बिगाड़ सकते। इसीलिए तुम बगुलों से दोस्ती कर दो।

तुम उनके बच्चों को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाओगे। और वह तुम्हारे शिकार को नीचे नहीं फेंकेगे। और इस तरह तुम दोनों अच्छे से रह पाओगे।”

वह तेंदुए ने यह बात मान ली। बगुले ने भी राजा शेर की बात मान ली। इसके बाद वह दोनों शांति से अपना जीवन जीने लगे।

सीख:

 हम अपनी बुद्धि से कितनी भी बड़ी समस्या का समाधान निकाल सकते हैं। इस कहानी में तेंदुआ बहुत शक्तिशाली होने के बावजूद भी उन बगुलों की चालाकी की वजह से उसको हार माननी पड़ी।

 इसी को तो बुद्धिमानी की ताकत कहते हैं। और साथ ही इस कहानी से हमें एकता की बहुत बड़ी सीख मिलती है कि अगर हम साथ मिलकर मुसीबत का सामना करें तो कोई भी मुसीबत ज्यादा समय तक टिक नहीं सकती। इस कहानी में भी उन बगुलों और लकड़बग्घे की एकता ही है जिसने उस तेंदुए को हरा दिया।

Moral of this short hindi story:

Moral stories in hindi for class 7, Hindi moral stories for class 7, Hindi story with moral for class 7: We can solve any big problem with our intelligence. Despite the leopard being very powerful in this story, he had to give up due to the cunning of those herons.

This is called the power of intelligence. And at the same time, we get a great lesson of unity from this story that if we face trouble together then no trouble can last long. In this story too, there is the unity of herons and hyena that defeated that leopard.

उद्देश्य: 

इन पांच कहानी संकलन का मेरा उद्देश्य है की विधार्थी और कोई भी जो जीवन में सफल होना चाहता है, वह इन स्टोरीज़ के माध्यम से प्रेरणा ले और अपने सफलता के राह पर ओर तेजी के साथ आगे बढे। जो कोई भी यह कहानियाँ पढ़े उनके जीवन में मेरी यह कहानियाँ के माध्यम से हकारात्मक बदलाव आये ऐसी में कामना करता हूँ।


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